कानपुर का बर्रा इलाका. 22 जून को यहां रहने वाले संजीत यादव नाम के लड़के का अपहरण हुआ था. अब जानकारी सामने आई है कि संजीत की मौत हो चुकी है. कानपुर पुलिस ने 23 जुलाई की रात किडनैपिंग के मामले में करीब पांच लड़कों को गिरफ्तार किया था. उनसे हुई पूछताछ में पता लगा कि संजीत की हत्या की जा चुकी है. बाएं से दाएं: संजीत यादव. उनकी बहन रुचि, मौत की खबर सुनने के बाद घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हुआ.
‘इंडिया टुडे’ से जुड़े रंजय सिंह के मुताबिक कानपुर SSP (सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) दिनेश कुमार ने बताया कि संजीत की किडनैपिंग के केस में उसके (संजीत) ही कुछ साथियों को पकड़ा गया है. उन लोगों ने पुलिस को जानकारी दी कि 26 या 27 जून को ही उन्होंने संजीत की हत्या कर दी थी. फिर 29 जून को घरवालों को कॉल करके फिरौती में 30 लाख रुपए मांगे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांडू नदी में संजीत के शव की तलाश की जा रही है. SSP ने कहा,
“थाना बर्रा क्षेत्र में एक युवा संजीत की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी गई थी. बाद में 26 जून को उसे FIR में बदला गया. 29 जून को फिरौती के लिए कॉल आया था परिवार वालों के पास. इस मामले में अलग से टीम गठित की गई थी. क्राइम ब्रांच की. उनके द्वारा आज कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है. इनमें से दो उनके (संजीत) खास दोस्त थे. जो कि संजीत के साथ किसी अन्य पैथोलॉजी लैब में काम कर चुके हैं. उनके द्वारा ये कुबूल किया गया है कि संजीत का 26 या 27 जून को ही इन्होंने मर्डर किया है. इन लोगों ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मर्डर किया है. और शव को पांडू नदी में डिस्पोज़ कर दिया गया है. ऐसी जानकारी मिली है. अलग-अलग टीम गठित करके उसे रिकवर करने के लिए तलाश की जा रही है. मोबाइल और बाइक के बारे में भी जानकारी ली जा रही है.”
SSP दिनेश कुमार.
घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल
संजीत की मौत की खबर सुनने के बाद से ही घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है. उनकी बहन रुचि का कहना है कि पुलिस की लेटलतीफी के चलते ये सब हुआ. उनका कहना है,
“मेरा भाई अब नहीं है. उन चारों लड़कों को हम भी ज़िंदा नहीं रखेंगे. वो जो चार हैं. उन्हें हम अपने सामने मारेंगे. देखते हैं कौन हमारा क्या कर लेगा. मेरा भाई नहीं तो वो भी नहीं. जैसे मेरे मां-बाप भटक रहे हैं, वैसे उनके मां-बाप भी भटकेंगे. जो मेरे भाई के साथ किया है उन्होंने. पुलिस प्रशासन को दिखाएंगे कि क्या चीज़ होती है आम जनता जिसके साथ धोखा करते हैं वो. इतनी देर तक सोती रही पुलिस, एक्शन में क्यों नहीं आई. एक्शन में आ जाती तो मेरे भाई के साथ ये नहीं होता. कहां रखा है मेरे भाई को? दिखाया जाए हमको. पुलिस क्या करती रही? कॉल आती रही हमें, क्यों नहीं ट्रेस किया? क्या सोती रही? प्रशासन सोता रहा? ये कप्तान सर तब क्या कर रहे थे? मुझसे कह रहे थे कि आपको आपका लड़का लाकर देंगे, दे दिया लड़का? दे दिया? हमें बड़ा भरोसा था कि सर लाकर देंगे हमें लड़का. हमें मेरा भाई लाकर देंगे. खुद का बच्चा जाता है तब पता चलता है.”
संजीत का परिवार ये कह रहा है कि उनका बेटा उनके पास नहीं है, इसलिए अब वो भी आत्मदाह कर लेंगे. संजीत के पिता का कहना है,
“कप्तान साहब (SSP) के ऑफिस में जाकर वहीं आत्मदाह कर लेंगे. जब हमारा बच्चा ही नहीं है तो हम जीकर क्या करेंगे.”
किसी ‘राहुल’ का ज़िक्र
परिवार किसी राहुल का भी नाम ले रहा है. परिवार का कहना है कि उस ‘राहुल’ को खत्म किया जाए. मां ने कहा,
“उस राहुल को सजाकर रखा है. उसे खत्म किया जाए.”
बहन का भी ये कहना है कि राहुल के चाचा खुद डिपार्टमेंट में हैं, इसलिए उससे पूछताछ नहीं हो रही, क्योंकि अगर ऐसा होगा तो स्टाफ की ही बदनामी होगी. हालांकि ये राहुल क्या गिरफ्तार हुए लड़कों में शामिल है या नहीं? इसकी जानकारी नहीं मिली है अभी तक.
फिरौती की रकम भी दिलवा दी!
संजीत की मां ने रोते हुए कहा कि जीवन भर जो भी जोड़ा था, सब न्योछावर कर दिया, फिर भी बेटा नहीं मिला. बहन रुचि का भी कहना है कि उन्होंने किडनैपर्स को पूरे तीस लाख रुपए दिए थे, फिर भी भाई नहीं मिला. समाचार एजेंसी ANI UP के मुताबिक, कानपुर रेंज के IG मोहित अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा,
“संजीत के रिश्तेदार ये दावा कर रहे हैं कि उन्होंने फिरौती की तीस लाख की रकम किडनैपर्स को दी है. हमारी अभी तक की जांच के मुताबिक हमने ये पाया है कि फिरौती का पैसा नहीं दिया गया है, फिर भी हम इस मामले की हर एंगल से जांच कर रहे हैं.”
और क्या जानकारी सामने आई?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोहित अग्रवाल ने घटना के बारे में और जानकारी देते हुए कहा,
“22 तारीख को अपहरण करने के बाद इन लोगों ने उस व्यक्ति को उस मकान में रखा. 26 तारीख की रात जब उस व्यक्ति ने भागने की कोशिश की, तो इन लोगों ने फैसला लिया कि इस व्यक्ति को मार दिया जाए. और 27 तारीख की सुबह ही इन लोगों ने इस व्यक्ति की गला दबाकर हत्या कर दी. फिर नहर में इसके शव को फेंक दिया. पूरी घटना में ज्ञानेंद्र यादव की गाड़ी का इस्तेमाल व्यक्ति का अपहरण करने के लिए किया था. ये व्यक्ति 22 जून की शाम में करीब पौने आठ बजे अस्पताल से निकला था और अपनी बाइक से गया था. इन अभियुक्तों की निशानदेही पर उस बाइक को बरामद कर लिया गया है, जिससे ये व्यक्ति जा रहा था. और उस गाड़ी को उन्होंने छिपा दिया था.”
IG ने आगे बताया कि हत्या के बाद 29 जून को पहली बार आरोपियों ने संजीत के परिवार से फिरौती की मांग की थी. आगे कहा,
“उस समय पुलिस ने एक जाल बिछाकर इन्हें झांसे में लेकर गिरफ्तार करने की कोशिश की, लेकिन किसी कारण से वो ऑपरेशन फेल हो गया. और लापरवाही के लिए तत्कालीन SHO रणजीत राय को निलंबित भी किया गया. अभी जिस जगह पर इन लोगों ने शव को फेंकने के बारे में बताया है, वहां पर हमारी टीम और गोताखोर लगे हुए हैं. कोशिश कर रहे हैं कि शव को हम बरामद कर लें.”
चार पुलिसवाले अब तक सस्पेंड हुए
बर्रा थाना के तत्कालीन SHO रणजीत राय, चौकी इन्चार्ज राजेश कुमार को सस्पेंड किया जा चुका है. इनके अलावा साउथ कानपुर की सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) अपर्णा गुप्ता और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (CO) मनोज गुप्ता को भी सस्पेंड कर दिया गया है. फिरौती के पैसे दिए गए या नहीं, इसकी जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं.
आरोपियों ने क्या बताया?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपियों से भी सवाल-जवाब किए गए. एक आरोपी ने बताया कि पैसे के लालच में आ गए थे, इसलिए संजीत को मार दिया.
30 लाख की फिरौती की कहानी
15 जुलाई को खबर आई थी कि संजीत के घरवालों से पुलिस ने फिरौती की रकम भी किडनैपर्स को दिलवा दी थी. करीब 30 लाख रुपए. घरवालों ने उस वक्त SSP के ऑफिस के सामने धरना दिया था. कहा था कि पुलिस ने बैग में 30 लाख रुपए रखवाकर किडनैपर्स को दिलवाया, लेकिन उसे पकड़ नहीं पाए. किडनैपर पैसा लेकर पुलिस के सामने से फरार हो गया. इस बयान के कुछ देर बाद रुचि का एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वो कह रही थीं कि बैग में पैसे नहीं थे, उन्होंने किसी के कहने पर वो कहानी बनाई थी. हालांकि इस बयान के बाद एक और बयान रुचि ने दिया था. कहा था कि बैग में पैसे थे और उनसे उनका बयान बदलने के लिए क्राइम ब्रांच के ही एक अधिकारी ने कहा था.
बैग में पैसे होने वाली बात पर रुचि और उनका परिवार अभी तक कायम है. वहीं पुलिस ने तब भी कहा था कि बैग में पैसे नहीं हैं. अभी भी पुलिस यही कह रही है. बैग में पैसे थे या नहीं? ये जांच का विषय है. लेकिन इस वक्त सच यही है कि एक परिवार अपने बच्चे को खो चुका है.
A video on Kerala's Health Minister K. K Shailaja who was honoured by the United Nations for her efforts to fight the coronavirus pandemic in her state
बैंकों और पोस्ट ऑफिस की घटती ब्याज दरों के बीच मोदी सरकार ज्यादा ब्याज वाली डिपॉजिट स्कीम लेकर आई है। इस स्कीम के तहत 7.15 फीसदी का ब्याज दिया जा रहा है। यह फ्लोटिंग रेट सेविंग बांड है, जिनमें कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। 7 साल वाले इन बांड में हर 6 में ब्याज का भुगतान किया जाएगा। यह बांड 1 जुलाई 2020 से जारी होंगे।
Comments
Post a Comment