मरकज़ी रोयते हिलाल कमेटी ने ऐलान किया है कि आज ज़िल हिज्जा का चांद नज़र नहीं आया इस साल ईद-उल-अज़हा 1 अगस्त को मनाई जाएगी.

फाइल फोटो
ज़िल हिज्जा का चांद आज नज़र नहीं आया जिसके बाद ऐलान किया गया कि हिंदुस्तान में ईद-उल-अज़हा का त्यौहार 1 अगस्त को मनाया जाएगा. मरकज़ी रोयते हिलाल कमेटी ने ऐलान किया है कि आज ज़िल हिज्जा का चांद नज़र नहीं आया इस साल ईद-उल-अज़हा 1 अगस्त को मनाई जाएगी.
इससे पहले अलग-अलग मुस्लिम तंजीमों की जानिब से चांद देखने की अपील की गयी थी और अलग-अलग शहरों की रोयते हिलाल कमेटी की जानिब से मुल्क के मुख्तलिफ हिस्सों से जानकारी ली गयी लेकिन कहीं से भी चांद होने की खबर मौसूल नहीं हुई.
जिसके बाद दिल्ली जामा मस्जिद, दिल्ली फतेहपुरी मस्जिद के अलावा लखनऊ समेत दूसरे शहरों की बड़ी तंजीमों की जानिब से ऐलान किया गया है कि हिंदुस्तान में 1 अगस्त को बकरीद का त्यौहार मनाया जाएगा.
बता दें कि इस साल कोरोना वायरस के चलते लगभग सभी त्योहारों पर खासा असर पड़ा है और इसका असर ईद-उल-अज़हा पर भी देखने को मिल रहा है. ईद उल अज़हा के 10 दिन बाकी रह गए हैं और अभी तक कहीं भी जानवरों के बाज़ार नहीं लगते दिखाई दिए. जबकि हर साल लगभग 15-20 दिन पहले से ही बाज़ार लगने शुरू हो जाते थे.
जानवरों के बाज़ार लगाने के लिए बकरा कारोबारी इजाज़त मांग रहे हैं लेकिन इंतेज़ामिया कारोबारियों को सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ने के डर से इजाज़त देने से इंकार कर देती है.

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ज़िल हिज्जा का चांद आज नज़र नहीं आया जिसके बाद ऐलान किया गया कि हिंदुस्तान में ईद-उल-अज़हा का त्यौहार 1 अगस्त को मनाया जाएगा. मरकज़ी रोयते हिलाल कमेटी ने ऐलान किया है कि आज ज़िल हिज्जा का चांद नज़र नहीं आया इस साल ईद-उल-अज़हा 1 अगस्त को मनाई जाएगी.
इससे पहले अलग-अलग मुस्लिम तंजीमों की जानिब से चांद देखने की अपील की गयी थी और अलग-अलग शहरों की रोयते हिलाल कमेटी की जानिब से मुल्क के मुख्तलिफ हिस्सों से जानकारी ली गयी लेकिन कहीं से भी चांद होने की खबर मौसूल नहीं हुई.
जिसके बाद दिल्ली जामा मस्जिद, दिल्ली फतेहपुरी मस्जिद के अलावा लखनऊ समेत दूसरे शहरों की बड़ी तंजीमों की जानिब से ऐलान किया गया है कि हिंदुस्तान में 1 अगस्त को बकरीद का त्यौहार मनाया जाएगा.
बता दें कि इस साल कोरोना वायरस के चलते लगभग सभी त्योहारों पर खासा असर पड़ा है और इसका असर ईद-उल-अज़हा पर भी देखने को मिल रहा है. ईद उल अज़हा के 10 दिन बाकी रह गए हैं और अभी तक कहीं भी जानवरों के बाज़ार नहीं लगते दिखाई दिए. जबकि हर साल लगभग 15-20 दिन पहले से ही बाज़ार लगने शुरू हो जाते थे.
जानवरों के बाज़ार लगाने के लिए बकरा कारोबारी इजाज़त मांग रहे हैं लेकिन इंतेज़ामिया कारोबारियों को सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ने के डर से इजाज़त देने से इंकार कर देती है.
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